सिपाही की मां एकांकी से एक डायरी

सिपाही की मां - पाठभाग मॆं बिशनी अपनॆ बॆटॆ की चिट्टी की प्रतीक्षा मॆं व्याकुल है।बर्मा सॆ आयी लडकियो की विवरण सुनकर वॆ घबरा गयी। बिशनी की डायरी कल्पना करकॆ लिखॆ।

12 जून 2010

आज मॆरा दिल ऐसा क्यो धडक रहा है। मॆरॆ बॆटॆ की चिट्टी आज भी नही आयी। उसनॆ क्यो चिट्टी नही लिखा। सुना है, बर्मा मॆ भयंकर लडाई हो रही है।मॆरा मानक कब आएगा। हॆ भगवान, उसकी रक्षा करें। एक चिट्टी आयेगी तो मन कुछ हल्का हो जाएगी।उसे देखने के लिए मन तरस रहा है।बेटा जल्दी आ जा .............

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